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उम्र के आखिरी पड़ाव पर छोड़ा पत्नी का साथ, 90 की आयु में कहा- तलाक, तलाक, तलाक

April 6, 2017

201704062200032606_tripal-talaq-in-gorakhpur_SECVPFगोरखपुर। जिले में तीन तलाक की हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। बुजुर्ग मुस्लिम पति शादी के बाद से साथ रहने के बाद उम्र के इस पड़ाव पर अपनी 80 वर्षीय पत्नी को तीन तलाक बोल दिया। तलाक बोलने की घटना भी हैरान करने वाली ही है। पत्नी का आरोप है कि वह उनके जीते-जी उनके लिए कफन खरीद कर नहीं लाई।

गोरखपुर के गाजीरौजा मोहल्‍ले के रहने वाले 90 की उम्र पार कर चुके हबीब शा ने सात साल पहले अपनी बीवी 80 साल की जै‍बुन्निशा को तलाक दे दिया. हबीब को सात साल पहले लकवा मार दिया. उन्‍हें अपने बेटों के ऊपर विश्‍वास नहीं था। उन्‍होंने अपनी बीवी से कहा कि वह उनके जीते-जी उनके लिए कफन खरीद दें। लेकिन, जै‍बुन्निशा ने उनकी बात नहीं मानी. इसी बात पर नाराज होकर हबीब ने अपनी बीवी को तीन बार तलाक बोल कर तलाक दे दिया. हबीब अपने छोटे बेटे वकील शा के साथ शहर के बीचोंबीच गाजीरौजा में रहते हैं. वहीं उनकी बीवी अपने पांच बेटों के साथ शहर के उत्‍तरी छोर पर नकहा में रह रही है. वह छोटी सी गुमटी में परचून की दुकान चलाकर गुजर बसर कर रही हैं.

बीवी को तलाक के मसले पर हबीब का कहना है कि उन्‍हें तलाक देने का कोई मलाल नहीं है। हबीब और जैबुन्निशा के छह बेटे और दो बेटियों का भरा-पूरा परिवार है। उनके कुनबे में 50 से अधिक लोग हैं। सभी बच्‍चों की शादी हो चुकी है और उनके नाती-पोते भी हैं। लेकिन, फिर भी हबीब कहते हैं कि उन्‍हें इस उम्र में तलाक देने का कोई मलाल नहीं है। वह इसे सही कदम और अल्‍लाह की मर्जी मानते हैं।

उनका कहना है कि कुरान और हदीस के साथ उनके धर्म में यह व्‍यवस्‍था दी गई है कि यदि बीवी, शौहर का कहना नहीं मानती है तो उसे तलाक दिया जा सकता है। उन्‍होंने जो कदम उठाया है वह सही है। वह कहते हैं कि देश में जो तीन तलाक पर बहस छिड़ी हुई है वह गलत है। धर्म के मामले में जो लिखा है उसे बदला नहीं जा सकता है।

पत्नी को तीन तलाक से है नफरत
अपने शौहर के इस फैसले पर आज भी जै‍बुन्निशां के दिल में टीस साफ झलकती है। वह कहती हैं कि वह अपने पांच बेटों के साथ अलग रहती हैं। वह इस फैसले को गलत मानती है और कहती हैं कि इस उम्र में हलाला को वह कैसे पूरा कर सकती हैं। उनके नाती-पोतों सहित भरा-पूरा परिवार है। कफन नहीं खरीदने पर उनके शौहर हबीब ने उन्‍हें तलाक दिया। आज वह ऐसे दो-राहे पर खड़ी हैं जहां से उन्‍हें कोई दूसरा रास्‍ता नजर नहीं आता है। वह कहती हैं कि जो मुस्लिम धर्म और कुरान में लिखा है वह उस पर अमल करने को मजबूर हैं। यही वजह है कि पिछले सात साल से उन्‍होंने अपने शौहर का न तो मुंह देखा है और उनके शौहर ने उनका मुंह।

बेटों में तीन तलाक को लेकर मतभेद
वहीं हबीब के साथ रह रहे उनके छोटे बेटे वकील शा का कहना है कि अब्‍बू ने जो फैसला लिया वह पूरी तरह सही है। वह अपनी बीवी और बच्‍चों के साथ उनके साथ रहते हैं। उन्‍हें लगता है कि इस मुद्दे पर वेवजह देश में बहस छिड़ी हुई है। मुस्लिम धर्म और कुरान, हदीस में जो लिखा है उसे कानून के दायरे में नहीं लाया जा सकता है। वहीं हबीब के बड़े बेटे तीन तलाक पर अपनी राय तो पिता जैसी ही रखते हैं लेकिन अपनी मां जै‍बुन्निशा के साथ रहते हैं।  उनका कहना है कि जब अब्‍बू ने अम्‍मी को तलाक दे दिया, तो फिर उनका धर्म कहता है कि उन्‍हें उनके साथ नहीं रहना चाहिए। वह उसका पालन कर रही हैं।

काजी ने रखी आपनी राय
शहर काजी वलीउल्‍लाह का कहना है कि हालांकि तैश में लिया गया फैसला गलत होता है। लेकिन, मुस्लिम धर्म और कुरान, हदीस में जो व्‍यवस्‍था दी गई है, उसका पालन करना ही पड़ता है। उन्होंने कहा कि  90 की उम्र में तलाक को वह सही मानते हैं। हालांकि तलाक देने के कारणों पर उनकी अलग राय है। वह कहते हैं कि 100 साल की उम्र में भी हलाला की रस्‍म पूरी की जाती है। यह कोई बहस का मुद्दा नहीं है कि 90 की उम्र में तलाक दे दिया तो हलाला कैसे पूरा होगा। वह कहते हैं कि तीन तलाक पर देश में जो बहस छिड़ी हुई हैं वह मुस्लिमों को सरकार द्वारा कमजोर करने की साजिश है। देश कोई भी हो इस्‍लाम स‍बके लिए एक है। कुरान की इनायतों को बदला नहीं जा सकता। चाहें वह अरब हो या फिर पाकिस्‍तान। तीन तलाक को कानून के दायरे में लाना गलत है।


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