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2019 पर नजर, आंध्र को साधने के लिए मोदी सरकार ने चला ये ‘दांव’

March 15, 2018 , अजीत तिवारी

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आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र ने राज्य को विशेष सहायता के तौर पर 12,476 करोड़ रूपये देने की घोषणा की है. 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर केंद्र की मोदी सरकार ने इस सहायता राशि के जरिए आंध्र प्रदेश में सत्ता पर काबिज तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी) की सरकार को साधने की कोशिश की है.

उल्लेखनीय है कि आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ और राजग का घटक टीडीपी राज्य को विशेष दर्जा दिए जाने की मांग कर रहा है. इस मांग पर जोर देने के लिए पार्टी ने केंद्र सरकार में शामिल अपने दोनों मंत्रियों अशोक गजपति राजू और वाई एस चौधरी को हटा लिया था. इस दौरान टीडीपी के एनडीए गठबंधन से अगल होने की खबर भी आई. लेकिन पीएम मोदी ने आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात कर इस मामले को दो मंत्रियों के इस्तीफे तक ही रोक लिया.

दोनों पार्टियों को एक-दूसरे की जरूरत

हालांकि, दोनों पार्टियों (बीजेपी और टीडीपी) को एक-दूसरे की जरूरत है और यह जरूरत टीडीपी को ज्यादा है. एक सरल अंकगणित है कि 2019 के आम चुनाव में राज्य में टीडीपी के सामने कई कठिन चुनौतियां हैं. इनमें से कई चुनौतियां नरेन्द्र मोदी सरकार से मदद के बिना पूरा नहीं किया जा सकता है. यही कारण है कि हर मौके पर केंद्र के प्रति नाराजगी जाहिर करने के बावजूद टीडीपी खुद को एनडीए से अलग नहीं कर पाई.

मोदी सरकार का आंध्र को विशेष सहायता

केंद्र सरकार ने आज बताया कि आंध्र प्रदेश को विशेष सहायता के तौर पर 12,476.76 करोड़ रूपए जारी किए गए हैं. इसमें से 2500 करोड़ रूपए नए राजधानी शहर के लिए हैं. गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने केवीपी रामचंद्र राव के एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि केंद्र और आंध्र प्रदेश की सरकारें आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के प्रावधानों को कार्यान्वित करने के लिए एक साथ मिलकर कार्य कर रही हैं.

क्या है टीडीपी की नाराजगी

टीडीपी का कहना है कि केंद्र सरकार राज्यसभा में दिए आश्वासनों को पूरा करने में नाकाम रही है. राज्यसभा में पीएम ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने का आश्वासन दिया था. पार्टी का कहना है कि बीजेपी के साथ गठबंधन इसलिए किया गया था ताकि आंध्र प्रदेश के साथ न्याय हो सके, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

पार्टी की ओर से कहा गया कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू 29 बार दिल्ली गए, प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों से मिले, राज्य से जुड़े मामलों पर कई बार अनुरोध किया, लेकिन कुछ नहीं हुआ. आंध्र प्रदेश को अवैज्ञानिक तरीके से विभाजित किया गया, जिससे आज कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

नायडू ने याद दिलाया था मोदी का भाषण

नायडू ने मोदी का भाषण याद दिलाते हुआ था कि नरेंद्र मोदी ने पीएम के उम्मीदवार के तौर पर कहा था कि कांग्रेस ने एक शिशु( तेलंगाना) को जन्म दिला कर मां( आंध्र प्रदेश) की हत्या कर दी. उन्होंने कहा कि हमने मोदी पर भरोसा किया लेकिन वह इसे हकीकत में तब्दील करने की स्थिति में नहीं हैं. इसलिए हम उनसे पुरजोर तरीके से पुनर्गठन अधिनियम में किए वादों का सम्मान करने की अपील करते हैं.

विशेष राज्य के दर्जा पर केंद्र की ना!

केंद्र सरकार भले ही आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन उसने संकेत दिए थे कि आंध्र प्रदेश के विकास के लिए आर्थिक सहायता देने के साथ ही विजयवाडा और विशाखापट्टनम के लिए मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को भी मंजूरी देने को तैयार है. टीडीपी की मांग थी कि मोदी सरकार उस वादे को पूरा करे जो आंध्र प्रदेश के विभाजन के दौरान तत्कालीन सरकार ने किया था.

केंद्र के सामने क्या हैं अड़चनें

सरकार आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की टीडीपी की मांग को इसलिए नहीं मांग सकती क्योंकि किसी भी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए नियमों में बदलाव करने पड़ेंगे. अगर नियमों में बदलाव करके टीडीपी की मांग को मान लिया तो बिहार, झारखंड जैसे अन्य राज्य भी इस तरह की मांग कर मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं. इसलिए मोदी सरकार टीडीपी की मांग के आगे किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं है.

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