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कैथोलिक चर्च का इतिहास हुआ दागदार, पहली बार यौन शोषण आरोपी धर्मगुरू पर चला मुकद्दमा

May 1, 2018

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मेलबर्न :   विश्व में कैथोलिक पादरियों द्वारा हजारों यौन उत्पीडऩ के मामले सामने आ चुके हैं। अकेले 2001-10 के कालखंड में 3 हजार पादरियों पर यौन उत्पीडऩ और कुकर्म के आरोप लग चुके हैं, जिनमें अधिकतर मामले 50 साल या उससे अधिक पुराने हैं। लेकिन कैथोलिक चर्च का इतिहास उस समय दागदार हो गया जब ऑस्ट्रेलिया में यौन अपराधों के एेतिहासिक आरोपों से घिरे देश के सबसे वरिष्ठ कैथोलिक धर्मगुरू व वेटिकन के वित्त प्रमुख कार्डिनल पेल कैथोलिक चर्च के पहले ऐसे शीर्ष अधिकारी बन गए हैं जिन पर आज मुकद्दमा चलाया गया।  मेलबर्न में सुनवाई के दौरान पेल (76) भाव शून्य खड़े रहे। सुनवाई के दौरान उन्हें ‘‘ कई ’’ आरोपों का सामना करने का आदेश सुनाया गया।

इनमें से आधे आरोप बेहद गंभीर हैं। मेलबर्न की मैजिस्ट्रेट  ने कहा कि वह इस बात से  संतुष्ट हैं कि  कई आरोपों पर मुकद्दमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। उन्होंने मुकदमे की तारीख पर चर्चा के लिए कल सुनवाई करने का निर्देश दिया। बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में अदालत में प्रवेश करने वाले पेल को इस शर्त पर जमानत पर रिहा किया गया कि वह ऑस्ट्रेलिया छोड़कर नहीं जाएंगे। उन्होंने पहले ही अपना पासपोर्ट जमा करा दिया है।

बता दे कि जॉर्ज पेल पर ऑस्ट्रेलिया में कई बाल यौन अपराधों के आरोप तय किए जा चुके हैं।   पेल से गत वर्ष अक्तूबर में आस्ट्रेलियाई पुलिस ने रोम में पूछताछ की थी। हालांकि उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया था। पेल का कहना है कि वह इन सभी मामलों में निर्दोष हैं और उनके लिए  यौन शोषण का विचार ही घृणित है। जबकि  विक्टोरिया स्टेट पुलिस के अनुसार  वकीलों से सलाह-मशविरे के बाद कार्डिनल पर आरोप लगाए गए थे।  पेल को 1971 में ऑस्ट्रेलिया लौटने से पहले 1966 में रोम में पादरी बनाया गया था और वह देश के शीर्ष कैथोलिक अधिकारी बने । पोप फ्रांसिस द्वारा चर्च के वित्तीय मामलों को और अधिक पारदर्शी तरीके से संभालने के लिए चुने जाने के बाद वह 2014 में वेटिकन आए।

 इसलिए चर्च में यौन उत्पीडऩ के मामले रह जाते दबे 
रोमन कैथोलिक चर्च एक कठोर सामाजिक संस्था है, जो हमेशा अपने विचार और विमर्श को गुप्त रखती है। अपनी नीतियां स्वयं बनाती है और मजहबी दायित्व की पूर्ति कठोरता से करवाती है। जब कोई पादरी कार्डिनल बनाया जाता है तो वह पोप के समक्ष वचन लेता है, ‘‘वह हर उस बात को गुप्त रखेगा, जिसके प्रकट होने से चर्च की बदनामी होगी या नुक्सान पहुंचेगा।’’ इन्हीं सिद्धांतों के कारण पादरियों, बिशप और कार्डिनलों द्वारा किए जाते यौन उत्पीडऩ के मामले दबे रह जाते हैं और चर्च या फिर अन्य कैथोलिक संस्थाओं को बदनामी से बचाना मजहबी कर्त्वय बन जाता है।

पोप फ्रांसिस मांग चुके माफी
पोप फ्रांसिस   पादरियों के द्वारा बच्चों के यौन शोषण की वज़ह से हुए ‘शैतानी’ नुकसान के लिए माफ़ी मांग चुके हैं। वेटिकन रेडियो द्वारा दिए गए उद्धरण में, उन्होंने   बच्चों के साथ हुए यौन शोषण को “चर्च के पादरियों द्वारा की गई नैतिक क्षति” के रूप में वर्णित किया था और कहा कि उन पर “प्रतिबंध” लगाया जाएगा। इसे इस मुद्दे पर अब तक के सबसे मजबूत बयान के रूप देखा गया और इससे पहले पादरियों द्वारा बच्चों के यौन शोषण के मामले में पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं देने के लिए वेटिकन की आलोचना की गई थी।

 संयुक्त राष्ट्र भी उठा चुका आवाज  
इस मामले में संयुक्त राष्ट्र भी आवाजा उठा चुका है। संयुक्त राष्ट्रने ने यह कहते हुए वेटिकन की आलोचना की थी कि चर्च सिर्फ अपनी प्रतिष्ठा को बचाने में लगा रहा। संयुक्त राष्ट्र की इसकी टिप्पणी को  चर्च ने कड़े शब्दों में ख़ारिज कर दिया था। रोम से  डेविड विले की रिपोर्ट के मुताबिक़ पोप ने यौन शोषण के पीड़ितों के मदद के लिए पिछले साल एक समिति का गठन किया था लेकिन कुछ कैथोलिक पादरियों के द्वारा इससे नैतिक और मानसिक क्षति होने का आरोप लगाने के बाद इस क़दम से पैर खींच लिए थे।

सरकारी खोज-बीन और मामलों की सुनवाई दौरान हुए चौंकाने वाले खुलासे
जानकारी के मुताबिक  धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष संस्था के भीतर हुए बाल यौन शोषण मामलों में चल रही सरकारी खोज-बीन और मामलों की सुनवाई के दौरान पता चला  कि जिहोवा विटनेस चर्च ने बाल यौन शोषण से जुड़े एक हज़ार से अधिक आरोपों को छिपाया गया। जांच में कहा गया कि चर्च ने बाल यौन शोषण के इन एक हज़ार से अधिक आरोपों में से एक के बारे में भी पुलिस को नहीं बताया गया था। चर्च के पादरियों द्वारा बाल यौन शोषण की शिकायतें साल 1950 से मिलनी शुरू हुई. मगर बताया जा रहा है कि सारे मामलों को अंदरूनी स्तर पर ही सुलझा लिया गया था।

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