Flash News
മുഖ്യമന്ത്രിയും തെരഞ്ഞെടുപ്പു വിധിയും: അപ്പുക്കുട്ടന്‍ വള്ളിക്കുന്ന്   ****    പട്ടാള ഭരണത്തിനെതിരെ സമരം ചെയ്ത എഴുപതോളം വനിതകളെ സുഡാന്‍ സൈന്യം കൂട്ട ബലാത്സംഗം ചെയ്തെന്ന് റിപ്പോര്‍ട്ട്; ഐക്യരാഷ്ട്ര സംഘടന അന്വേഷണം പ്രഖ്യാപിച്ചു   ****    തിരുവനന്തപുരം വിമാനത്താവളം പൊതുമേഖലയില്‍ത്തന്നെ നിലനിര്‍ത്തണമെന്ന് മുഖ്യമന്ത്രി; സംസ്ഥാനത്തിന്റെ എതിര്‍പ്പ് പ്രധാനമന്ത്രിയെ ധരിപ്പിച്ചു   ****    ചിക്കാഗോ സമുദായ നേതാക്കള്‍ അറ്റ്‌ലാന്റയിലെ ഹോളി ഫാമിലി ക്നാനായ പള്ളിയുടെ ദശാബ്‌ദി ആഘോഷത്തിന് പിന്തുണയുമായി മുന്‍നിരയില്‍   ****    വനിതാ പോലീസ് ഉദ്യോഗസ്ഥയെ തീ കൊളുത്തി കൊന്നു; കൊലയാളി പിടിയിൽ   ****   

दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने से SC का इनकार

September 25, 2018

SUPREME_COURT_8596f-2नई दिल्ली : दागी नेताओं और गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पांच साल या उससे ज्यादा सजा होने वाले मामले में आरोप तय होने के बाद चुनाव लड़ने से अयोग्य करार देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अयोग्यता का प्रावधान अदालत नहीं जोड़ सकती। यह काम संसद का है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को चाहिए कि इस मामले में प्रावधान के बारे में सोचे।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वह विधायिका के दायरे में जाकर दागी नेताओं को चुनाव से प्रतिबंधित कर लक्ष्मण रेखा नहीं लांघ सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा कि राजनीति में अपराधीकरण और भ्रष्टाचार, लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है। साथ ही कहा कि अयोग्यता का प्रावधान सुप्रीम कोर्ट नहीं जोड़ सकती।

बोल्ड अक्षरों में लिखें आपराधिक रिकॉर्ड, विज्ञापन में भी दें जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने दागी नेताओं को चुनाव लड़ने से तो नहीं रोका लेकिन काफी सख्ती जरूर दिखाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन कैंडिडेट के खिलाफ क्रिमिनल केस पेंडिंग हो, वह नामांकन के वक्त हलफनामा जब दाखिल करें तो क्रिमिनल केस के बारे में बोल्ड अक्षरों में लिखें। वोटर को इस बात का पूरा अधिकार है कि वह जाने कि कैंडिडेट का क्रिमिनल रिकॉर्ड क्या है। अदालत ने कहा कि अगर कोई कैंडिडेट चुनाव के लिए खड़ा होता है तो पॉलिटिकल पार्टी उसके क्रिमिनल रिकॉर्ड के बारे में मीडिया के जरिये विस्तार से लोगों को बताए। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक सभी प्रकार के विज्ञापनों में इसकी जानकारी देने को कहा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सारे राजनीतिक दलों को अपनी वेबसाइट पर सभी उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास की जानकारी देनी होगी। फैसला सुनाते वक्त चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने कहा कि भ्रष्टाचार राष्ट्रीय आर्थिक आतंक है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर पांच साल या उससे ज्यादा सजा के मामले में अरोप तय होने के बाद चुनाव लड़ने से रोक की गुहार लगाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले को संसद के पाले में डाल दिया है।

केंद्र ने कहा था कानून बनाना संसद का काम
सुनवाई के दौरान अटर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार की ओर से पेश होते हुए कहा था कि यह कानून बनाना संसद के अधिकार-क्षेत्र में है और सुप्रीम कोर्ट को उसमें दखल नहीं देना चाहिए। वेणुगोपाल ने कहा था कि अदालत की मंशा प्रशंसनीय है लेकिन सवाल है कि क्या कोर्ट यह कर सकता है? मेरे हिसाब से नहीं। उन्होंने कहा था कि संविधान कहता है कि कोई भी तब तक निर्दोष है जब तक वह दोषी करार न दिया गया हो।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि क्या चुनाव आयोग ऐसी व्यवस्था कर सकता है कि जो लोग क्रिमिनल बैकग्राउंड के हैं उनके बारे में डीटेल सार्वजनिक किया जाए। वेणुगोपाल ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि जहां तक सजा से पहले ही चुनाव लड़ने पर बैन का सवाल है तो कोई भी आदमी तब तक निर्दोष है जब तक कि कोर्ट उसे सजा नहीं दे देता और संविधान का प्रावधान यही कहता है।


Like our page https://www.facebook.com/MalayalamDailyNews/ and get latest news update from USA, India and around the world. Stay updated with latest News in Malayalam, English and Hindi.

Print This Post Print This Post
To toggle between English & Malayalam Press CTRL+g

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Read More

Scroll to top