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कैसे बनता है कुट्टू का आटा, जाने सावन के व्रत में इसे खाने के फायदे

July 24, 2019

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सावन माह शुरु होने के साथ शिवभक्‍त भगवान शिव की आराधना के साथ उनके व्रत भी रखेंगे। व्रत के दौरान खानपान से जुड़ी कई चीजों का ध्‍यान रखना होता है। इस दौरान अन्‍न खाने के मनाही होती है। व्रत रखने वाले लोग इस दौरान सबसे ज्‍यादा साबुदाना और कुट्टू के आटे का सेवन करते हैं।

कुट्टू के आटे को व्रत के आटे के नाम से भी कई लोग जानते हैं। यह अनाज की श्रेणी में नहीं आता हैं। लेकिन कई बार लोगों के जेहन में ये सवाल आता है कि अगर कुट्टू अनाज नहीं है तो फिर ये क्‍या है? और किस चीज से बनता हैं। आइए आज आपको बताते हैं कि व्रत में खाने वाला ये आटा आखिर किस चीज से बनता है?

दरअसल, कुट्टू को अंग्रेजी में Buckwheat के नाम से जाना जाता है, लेकिन इसका किसी तरह के अनाज से कोई संबंध नहीं है क्‍योंकि गेंहू अनाज और घास प्रजात‍ि का पौधा है कुट्टू (Buckwheat) का लैटिन नामक फैगोपाइरम एस्‍कलूलेंट है और यह पोलीगोनेसिएइ पर‍िवार का पौधा है। Buckwheat पौधे से एक फल प्राप्‍त होता है जो कि त‍िकोने आकार का होता है। पीसकर जो आटा तैयार किया जाता है, उसे Buckwheat यानी कुट्टू का आटा कहा जाता है।

भारत में यहां उगाया जाता है
कुट्टू का आटा पौधा लम्‍बाई में कुछ खास ज्‍यादा बड़ा नहीं होता है। इस पौधे में फूल और फल आते हैं। भारत में इसकी खेती बहुत ही कम जगह होती है। उत्तर भारत में ये हिमालयी क्षेत्रों जैसे जम्‍मू कश्‍मीर, ह‍िमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और दक्षिण भारत में नीलगिरी पर्वत के आसपास इसकी खेती की जाती हैं। भारत में इसका प्रयोग व्रत के दौरान खाई जाने वाली चीजों में ही होता हैं।

यहां भी खाया जाता है कुट्टू का आटा
भारत के अलावा कट्टू की फसल रुस, कजाकिस्‍तान, यूक्रेन और चीन में होती हैं। जापान में इस आटे के नूडल्‍स बनाई जाती है। चीन में इससे सिरका तैयार किया जाता है। जबकि अमेर‍िका और यूरोप में कट्टू यानी Buckwheat से केक, बिस्किट, और पैनकेक तैयार किया जाता है। आइए जानते है इसे खाने के फायदे।

वेटलॉस करने में फायदेमंद
कुट्टू 75 फीसदी जटिल काबोहाइड्रेट है और 25 फीसदी हाई क्वालिटी प्रोटीन, वजन कम करने में यह बेहतरीन मदद करता है। इसमें अल्फा लाइनोलेनिक एसिड होता है, जो एचडीएल कोलेस्ट्रोल को बढ़ाता है और एलडीएल को कम करता है।

पथरी होने से बचाएं
यह अघुलनशील फायबर का अच्छा स्रोत है और गॉलब्लैडर में पत्थरी होने से बचाता है। एक रिसर्च के मुताबिक, 5 फीसदी ज्यादा घुलनशील फायबर लेने से गाल ब्लैडर की पत्थरी होने का खतरा 10 फीसदी कम हो जाता है।

डायबिटीज वाले खाएं
फाइबर से भरपूर और ग्लिसेमिक इंडेक्स कम होने से यह डायबिटीज के मरीजों के ल‍िए बेहतर विकल्प है। कुट्टू के आटे का ग्लिसेमिक इंडेक्स 47 होता है।

कोलेस्ट्रॉल को रखे कंट्रोल
कुट्टू के आटे में एक खास प्रकार का एसिड होता है जिसे लाइनोलेनिक कहते हैं। ये खास एसिड एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है और एलडीएल को कम करता है।

इन बातों का रखें ध्‍यान
कुट्टू के आटे में आसानी से मिलावट की जा सकती है और इसे विश्वसनीय स्रोत से ही खरीदना चाहिए। पुराने कट्टू के आटे का इस्‍तेमाल करने से फूड-प्वॉयजनिंग हो सकती है। इसमे ग्लूटन नहीं होता इसलिए इसे बांधने के लिए आलू का प्रयोग किया जाता है। कुट्टू के आटे की पूरियां बनाने के लिए हाईड्रोजेनरेट तेल या वनस्पति का प्रयोग न करें, क्‍योंकि यह इसके मेडिकल तत्वों को खत्म कर देता है। इसके अलावा कुट्टू का आटा काफी गरम होता है इसलिए इसका ज्यादा सेवन करने से बचें।

Source : Agency


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