जीएसटी के अलावा इन तरीकों से भी पेट्रोल-डीजल पर राहत दे सकती है सरकार

pe

नई दिल्ली : पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बीते छह दिनों में मामूली कमी आई है, लेकिन अब दोनों के दाम अब तक अपने उच्चतम स्तर पर हैं। पिछले दिनों सरकार की ओर से इस पर आम लोगों को राहत देने की खबरें आई थीं, लेकिन सरकार ने कहा कि वह तात्कालिक राहत पर विचार करने की बजाय लॉन्ग टर्म में कोई समाधान तलाशने पर विचार कर रही है। जानें, किन 4 तरीकों से सरकार आम लोगों को पेट्रोल और डीजल में महंगाई से राहत दे सकती है…

1. जीएसटी: लंबे समय से ट्रेड असोसिएशंस की ओर से मांग की जा रही है कि पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए, लेकिन सरकार की ओर से अब तक आधिकारिक तौर पर इसे लेकर कुछ नहीं कहा गया है। पिछले सप्ताह ही डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमन ने कहा था कि राज्य सरकारों ने पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाए जाने पर सहमति नहीं दी है। हालांकि इस बीच पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कीमतों में कमी के लिए वैकल्पिक तरीके तलाशने को लेकर कंपनियों से बात की है। पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमत में तकरीबन आधा हिस्सा टैक्स का है। यदि ईंधन को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है और टैक्स की दर 40 फीसदी तक आ जाती है, तब भी 10 फीसदी की कटौती काफी अधिक होगी।

2. विंडफॉल टैक्स: क्रूड ऑइल के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंचने पर तेल कंपनियों को भी खासा लाभ हुआ है। देश में 20 फीसदी क्रूड ऑइल की सप्लाइ करने वाली कंपनी ओएनजीसी को क्रूड की कीमतों में इजाफे से विंडफॉल गेन हुआ है। ऐसे में कंपनी को कम दाम पर रिटेलर्स को तेल बेचने के लिए कहा जा सकता है। इसके बदले में सरकार कंपनी से कम लाभांश लेने का विकल्प दे सकती है।

3. फ्यूचर ट्रेडिंग: पेट्रोलियम मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने सैद्धांतिक रूप से भारतीय कमोडिटी एक्सचेंज में पेट्रोल और डीजल के फ्यूचर लॉन्च करने को मंजूरी दे दी है। कमोडिटी एक्सचेंज के एमडी संजित प्रसाद ने कहा, ‘हमें मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल गया है।’ हालांकि इसके लिए अभी सेबी की भी मंजूरी की जरूरत होगी। प्रसाद ने कहा, ‘यदि सेबी की ओर से मंजूरी मिल जाती है तो फिर हम एक दिन में ही प्रॉडक्ट्स की लॉन्चिंग कर सकते हैं।’

4. क्रूड डिस्काउंट: ओपेक (पेट्रोलियम निर्यात करने वाले देशों का संगठन) पश्चिमी देशों के खरीदारों के मुकाबले भारत सहित एशियाई देशों को उच्च दर पर तेल बेचता है। इसे ‘एशियन प्रीमियम’ कहा जाता है। सरकार अन्य देशों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है और उम्मीद है कि इससे छूट मिलेगी। कच्चे तेल की कीमतों में मार्केट करेक्शन का मतलब है कि खुद-ब-खुद राहत मिलना। किस्मत (तेल की कीमतों में गिरावट) की वजह से सरकार को सिर्फ एक साल वित्त वर्ष 2016-17 में 2.7 लाख करोड़ रुपये टैक्स के जरिये जुटाया।

Print Friendly, PDF & Email

Related posts

Leave a Comment