Flash News

वैश्विक धरोहरों का खजाना है यहां, हजारों साल पुरानी यादें मौजूद

April 18, 2017

01सांची स्तूप

रायसेन। देश-दुनिया में रायगढ़ की अपनी अलग पहचान है। क्योंकि यह पुरासंपदाओं और शैलचित्रों से समृद्ध जिला है। जितनी बड़ी संख्या में रॉक शेल्टर और रॉक पेंटिंग यहां मौजूद हैं, उतनी शायद देश के किसी अन्य जिले तथा दूसरे देशों में कहीं नहीं है। ऐतिहासिक काल एवं मध्यकाल में बनी यह रॉक पेंटिंग आज भी अपने मूल स्वरूप में विद्यमान हैं।

विशाल भू-भाग में फैले रॉक शेल्टर में वृहद संख्या में बनी रॉक पेंटिंग को देखते हुए रायसेन जिले को विश्व धरोहरों की राजधानी भी कहा जा सकता है। जिले में विश्व धरोहर सांची बौद्ध स्तूप तथा भीमबेटका के साथ ही भोजपुर शिव मंदिर, रायसेन किला, जामगढ़-भगदेई मंदिर, आशापुरी मंदिर श्रृंखला, द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया तथा बौद्ध स्मारक सतधारा-सोनारी सहित अनेक दर्शनीय स्थल मौजूद हैं।

02

सांची बौद्ध स्तूप दुनिया भर में बौद्ध धर्माबलंबियों का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहरों में शामिल किया है। यहां कई बौद्ध स्मारक हैं, जिनका निर्माण तीसरी शताब्दी ईपू से 12वीं शताब्दी के बीच हुआ है। सांची के स्तूपों का मुख्य आकर्षण उसकी चारों दिशाओं के तोरण द्वार हैं। जिन पर जातक कथाओं का उत्कीर्णन है। यहां छोटे-बड़े अनेकों स्तूप हैं, जिनमें स्तूप संख्या-2 सबसे बड़ा है। इस स्तूप को घेरे हुए कई तोरण भी बने हैं। स्तूप संख्या-1 के पास कई लघु स्तूप भी हैं, उन्हीं के पास एक गुप्तकालीन पाषाण स्तंभ भी है। सांची का महान मुख्य स्तूप, मूलतः सम्राट अशोक महान ने तीसरी शती, ईपू में बनवाया था। इसके केन्द्र में एक अर्धगोलाकार ईंट निर्मित ढांचा था। स्तूप परिसर स्थित मंदिर में भगवान बुद्ध के अनुयायी महामोग्लयान तथा सारिपुत्र की पवित्र अस्थियां रखी हुई हैं।

03

सतधारा-सोनारी
सांची के स्तूपों से भी पुराने बौद्ध स्मारक सांची विकासखण्ड के सतधारा एवं सोनारी में स्थित हैं। तीसरी शताब्दी ईपू से 12वीं शताब्दी के मध्यकाल के इन स्तूपों का विशेष महत्व है। बौद्ध स्तूप वन क्षेत्र में होने के कारण प्राकृतिक सौन्दर्य को निहारने का भी अवसर मिलता है। यहां देश-विदेश से अनेक पर्यटक आते हैं।

04

भीमबेटका
ओबेदुल्लागंज शहर से 9 किलोमीटर दूर भीमबेटका पाषाण आश्रय स्थल स्थित है। जोकि एक आर्कियोलॉजिकल साइट भी है, जो पाषाण काल और भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीन जीवन दृष्टि को दर्शाने वाली जगह है और यहीं से दक्षिणी एशियाई पाषाण काल की शुरुआत हुई थी। यहां पर स्थापित कुछ आश्रय होमो एरेक्टस द्वारा 1,00,000 साल पहले बसाये हुए हैं। भीमबेटका में पायी जाने वाली कुछ कलाकृतियां तो लगभग 30,000 साल पुरानी हैं। यहां की गुफाएं प्राचीन नृत्य कला का उदाहरण भी देती हैं। वर्ष 2003 में इन गुफाओं को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया था।

05

भोजपुर शिव मंदिर
भोजपुर स्थित परमारकालीन शिव मंदिर उत्तर का सोमनाथ नाम से प्रसिद्ध है। यह मंदिर स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। इस मंदिर को दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग के रूप में पहचाना जाता है। गर्भगृह में स्थित 7.5 फुट लंबा और 17.8 फुट परिधि का यह शिवलिंग एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया है, जो आश्चर्यजनक है। अपने अपार और जटिल संरेखण में शिवलिंग के साथ इस मंदिर को पूरब का सोमनाथ होने का गौरव प्राप्त है। परमारकालीन इस मंदिर पर प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि पर विशाल मेला लगता है। संस्कृति एवं पर्यटन विभाग द्वारा तीन दिवसीय भोजपुर उत्सव का आयोजन किया जाता है।

06

रायसेन किला
लगभग 12वीं शताब्दी में निर्मित रायसेन किला देश के ख्यात नाम दुर्गों में शामिल है। इसे अजेय दुर्ग होने का गौरव भी प्राप्त है। बेहद गौरवशाली परंपरा इस किले के साथ जुड़ी हुई है। इतिहास में कई जगह इसका वर्णन सुनने को भी मिलता है। तथा देश के कई बड़े राजाओं ने इस पर शासन किया है। मुगलों का आक्रमण भी इस किले पर कई बार हुए। लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से बेहद नायाब तरीके से बने इस किले की सुरक्षा में कभी कोई सेंध नहीं लगा पाया। रायसेन के ऐतिहासिक अजेय दुर्ग की भव्य इमारतें आज भी आसमान में मस्तक उंचा किए खड़ी हैं। राजा शिलादित्य सहित कई गौड़ राजाओं का इतिहास इस किले से जुड़ा है। किले में प्रसिद्ध शिव मंदिर, रानी राहिणी महल, रानीताल, झिंझरी महल, इत्रदान, बारादरी महल, कचहरी महल आदि महत्वपूर्ण महल स्थित हैं। यह किला रैन वाटर हार्वेस्टिंग का भी अनूठा उदाहरण है।

07

जामगढ़-भगदेई मंदिर
बरेली तहसील में जामगढ़-भगदेई का शिव मंदिर स्थापत्य कला का एक अनोखा उदाहरण है। यह मंदिर 9-10वीं शताब्दी का है। मंदिर महामण्डप अंतराल और गर्भगृह से युक्त है। यह पंचरथ योजना से निर्मित है। मंदिर का बाह्य भाग भी विशेष कलापूर्ण है, जिसमें ब्राम्हण देवी-देवताओं का अंकन किया गया है। जनश्रुति के अनुसार यह स्थान रामायण काल के जामवंत से संबंधित है। यहां जामवंत के पैरों के निशान भी देखने को मिलते हैं। जामगढ़-भगदेई गांव में परमार-प्रतिहार काल की समृद्ध पुरा-संपदा है। यहां मंदिरों की कई श्रृंखला और दुर्लभ मूर्तियां हैं। यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य से भी परिपूर्ण है।

08

आशापुरी मंदिर श्रृखंला
गौहरगंज तहसील में स्थित आशापुरी गांव अपनी पुरातत्वीय वैभव के लिये प्रसिद्ध है। गांव के समीप चार समूहों यथा आशादेवी मंदिर, भूतनाथ मंदिर, बिलौटा तथा सतमसियां में मंदिर के अवशेष विगत दशकों में चिन्हाकिंत हुए थे। आशापुरी में स्थित यह मंदिर 10वीं और 11वीं सदी में बनाए गए थे। यहां बिखरी पुरातत्वीय महत्व की कलाकृतियां विशेषतः प्रतिमाओं की सुरक्षा, अध्ययन व शोध को दृष्टिगत रखते हुए संकलन कर वर्ष 1977 में स्थानीय संग्रहालय की स्थापना की गई। यहां के संग्रहालय में बिलौटा मंदिर समूह से प्राप्त विष्णु चतुष्टिका तथा आस-पास के अन्य मंदिरों से संकलित विष्णु के मोहिनी रूप की प्रतिमा, शिव, विष्णु, सूर्य, ब्रह्मा, हरिहर, दिगपाल एवं देवी प्रतिमाएं महत्वपूर्ण हैं। संग्रहालय में संग्रहीत विशालकाय गणेश की प्रतिमा अपनी विशालता तथा शिल्पकला की दृष्टि से अद्वितीय है। बिलौटा से प्राप्त दो विष्णु चतुष्टिका शिल्पकला की द्रष्टि से महत्वपूर्ण है। इन दोनों ही चतुष्टिकाओं में नृसिंह, नृवराह, हरिहर एवं वामन का शिल्पाकंन है।

09

द ग्रेट वाल ऑफ इंडिया
देवरी के पास स्थित गोरखपुर गांव में लगभग 90 किलोमीटर लंबी एक परमारकालीन दीवार मिली है, जिसे अब तक की भारत में सबसे बड़ी दीवार माना गया है। इसे ‘द ग्रेव वाल ऑफ इंडिया’ का नाम भी दिया गया है। यह दीवार रायसेन जिले के उदयपुरा के गोरखपुर गांव से सटे जंगल से शुरू होती है और बाड़ी बरेली के पास चैकीगढ़ किले तक जाती है। इस दीवार की ऊंचाई 15 से 18 फीट और चैड़ाई 10 से 15 फीट है। कुछ जगह इसकी चैड़ाई 24 फीट तक है। दीवार को बनाने में लाल बलुआ पत्थर की बड़ी चट्टानों का इस्तेमाल किया गया है। इसके दोनों ओर विशाल चौकोर पत्थर लगाए गए हैं। दीवार के आसपास कई जमींदोज मंदिरों के अवशेष भी मिले हैं। यहां एक बेहद प्राचीन भैरव की प्रतिमा भी मिली है, जो प्राचीन होने के साथ-साथ दुर्लभ भी है। यहीं पास में मोघा डैम भी स्थित है।
इनख़बर


Like our page https://www.facebook.com/MalayalamDailyNews/ and get latest news update from USA, India and around the world. Stay updated with latest News in Malayalam, English and Hindi.

Print This Post Print This Post
To toggle between English & Malayalam Press CTRL+g

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Read More

Scroll to top