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सीएम योगी के ‘चित्रगुप्त’ कहे जाते हैं ‘डंडा बाबा’, फरियाद पहुंचाने के हैं पक्के माध्यम

May 4, 2017

yogiगोरखपुर। योगी आदित्‍यनाथ के मुख्‍यमंत्री बनने के बाद से मिनी सीएमओ यानी गोरखनाथ मंदिर में भी फरियादियों की भीड़ बढ़ गई है। ऐसे में बहुत से फरियादी ऐसे भी हैं जो गांव के हैं और पढ़े-लिखे भी नहीं हैं। इन फरियादियों के मददगार बनें हैं योगी के चित्रगुप्‍त। जो गोरखनाथ मंदिर में आने वाले ऐसे पीड़ितों का प्रार्थनापत्र लिखकर उनकी मदद कर रहे हैं।

दस वर्षों से दे रहे हैं अपनी सेवा
गोरखनाथ मंदिर परिसर में दस वर्षों से अपनी सेवा दे रहे ध्रुव प्रताप सिंह खुद में अनोखे हैं। इन्‍हें मंदिर में आने वाले फरियादी ‘डंडा बाबा’ के नाम से जानते हैं। डंडा बाबा सभी फरियादियों और आम लोगों की मदद के लिए उपस्थित रहते हैं। साक्षर और निरक्षर दोनों तरह के फरियादी जो अपना प्रार्थना पत्र नहीं लिख पाते हैं, वह डंडा बाबा की मदद लेते हैं।

महराजगंज जिले से आए शंकर मिश्रा के पिता स्‍वतंत्रता सेनानी रहे हैं। वह बताते हैं कि ‘आश्रित प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वह पिछले छह माह से जिलाधिकारी के यहां चक्‍कर लगा रहे हैं। डंडा बाबा ने प्रार्थनापत्र लिखकर उनकी मदद की है। उन्‍हें उम्‍मीद है कि हर बार की तरह इस बार भी उन्‍हें यहां से न्‍याय मिलेगा।’

रोजाना 200-250 प्रार्थना पत्र लिखते हैं डंडा बाबा
डंडा बाबा से लोग तब भी प्रार्थना पत्र लिखवाते रहे हैं, जब योगी आदित्‍यनाथ मुख्‍यमंत्री नहीं बने थे और गोरखनाथ मंदिर में उनका दरबार लगता रहा है। योगी आदित्‍यनाथ जब मुख्‍यमंत्री बन गए, तो मंदिर में आने वाले फरियादियों की संख्‍या भी अचानक बढ़ गई। ऐसे में योगी आदित्‍यनाथ से न्‍याय की आस लगाने वाले अधिकतर लोग ऐसे थे, जो गांव-देहात से थे। डंडा बाबा बताते हैं कि योगी आदित्‍यनाथ के मुख्‍यमंत्री बनने के बाद से यहां भीड़ काफी बढ़ गई है। ऐसे में उन्‍हें हर रोज 200 से 250 प्रार्थनापत्र लिखना पड़ रहा है। वह लोगों की निःस्‍वार्थ भाव से मदद कर रहे हैं।

बिना किसी झुंझलाहट के लिखते रहते हैं पत्र
डंडा बाबा ऐसे लोगों की मदद करने में जरा भी संकोच नहीं करते हैं। जब मंदिर में कम फरियादी आते थे तब भी वह लोगों के प्रार्थना पत्र लिखते रहे हैं और मंदिर में भीड़ बढ़ने के बाद भी वह निरंतर पत्र लिखते रहते हैं। माथे पर तिलक, गले में रुद्राक्ष की माला, सिर पर भगवा साफा और भगवा वस्‍त्र होने के साथ ही उनके हाथ में भगवा कलम ही उनकी पहचान बन चुकी है। तनाव तो जैसे उनसे कोसों दूर रहता है।

बगैर किसी झुंझलाहट के वह लोगों की बात सुनते हैं और प्रार्थना पत्र लिखकर उनकी मदद करते हैं। उसके बाद प्रार्थनापत्र के साथ योगी आदित्‍यनाथ के लेटर पैड पर आवश्‍यक निर्देश लिखकर उसे प्रार्थनापत्र के साथ संलग्‍न कर दिया जाता है।

पत्र मिलने से लोगों में बढ़ता है विश्वास
मंदिर में सिद्धार्थनगर जिले के चिल्हियां से आयीं एक महिला बताती हैं कि ‘ससुराल वाले घर से भगा रहे हैं। उनकी जान को खतरा भी है। वह बड़ी उम्‍मीद लेकर यहां आयी हैं। उन्‍हें यकीन है कि यहां पर उनकी मदद होगी। उन्‍हें पढ़ना-लिखना नहीं आता है। ऐसे में डंडा बाबा उनकी मदद कर रहे हैं। उन्‍होंने समस्‍या पूछकर प्रार्थना पत्र लिख दिया है और अब वह आगे की कार्रवाई के लिए कार्यालय में जा रही हैं।’

हर रोज कार्रवाई के लिए पत्र आगे भेजते हैं
गोरखनाथ मंदिर के कार्यालय प्रबंधक द्वारिका तिवारी बताते हैं कि पहले भीड़ कम होती थी। लेकिन, योगी आदित्‍यनाथ के मुख्‍यमंत्री बनने के बाद से यहां पर भीड़ काफी बढ़ गई है। ऐसे में डंडा बाबा और तीन अन्‍य लोगों को पीड़ितों के प्रार्थनापत्र लिखकर मदद के लिए लगाया गया है।

वह बताते हैं कि यह पत्र मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के कार्यालय को हर रोज शाम को आगे की कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दिया जाता है। डंडा बाबा बीच-बीच में उठकर जनता दरबार के बाहर भी जाते हैं और बाहर बैठे पीडि़तों से पूछते हैं कि कोई ऐसे भी फरियादी तो नहीं है जिसे कोई परेशानी है। ऐसे में उन्‍हें लोग योगी आदित्‍यनाथ और गोरखनाथ मंदिर के चित्रगुप्‍त कहकर भी बुलाने लगे हैं।
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