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यूपी टॉपर को नहीं पता इलेक्‍ट्रॉनिक विन्‍यास, रिजल्‍ट में गड़बड़ी की आशंका

June 9, 2017

topperफतेहपुर। उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षा में जिले ने अभूतपूर्व उपलब्धि पायी है। फतेहपुर शहर के सरस्वती बाल मंदिर इण्टर कालेज की प्रियांशी तिवारी ने 96.20 प्रतिशत अंक लाकर यूपी बोर्ड में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। वहीं जय मां सरस्वती इण्टर कालेज राधानगर की तेजस्वी विश्वकर्मा ने 95.83फीसदी अंको के साथ हाईस्कूल की परीक्षा में टाप किया है।

जिले के विद्यालयों और छात्र-छात्राओं में इस बार प्रदेश में हाईस्कूल और इण्टर परीक्षा के टॉपर आने से जहां खुशी का माहौल है, वहीं परिणामों को लेकर नुक्ताचीनी भी शुरू हो गयी है।

12वीं की टॉपर प्रियांशी ने अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता, प्रधानाचार्य एवं प्रबंधक के साथ-साथ हर रोज आठ घंण्टे पढाई को दिया है। हालांकि जब हमने टॉपर छात्रा से उसकी मेधा जांचने की कोशिश की गई तो मामला कुछ गड़बड़ मालूम हुआ।

पहले आप देखिए यूपी बोर्ड की परीक्षा में 12वीं कक्षा में टॉप करने वाली प्रियांशी की मार्कशीट

अब आइए बताते हैं कि हमने विज्ञान की छात्रा प्रियांशी से कौन-कौन से सवाल पूछे और हमें उत्‍तर क्‍या मिला।

  • सवाल नंबर एक – बोर-बरी योजना क्या है? (केमेस्‍ट्री)
  • उत्तर- ? (नहीं पता)
  • सवाल नंबर दो – टू एन स्कवैयर क्या है? (केमेस्‍ट्री)
  • जवाब – ? (नहीं पता)
  • सवाल नंबर तीन – परमाणु की कक्षाओं में इलेक्ट्रानों की स्थिति यानी इलेकट्रानिक विन्यास किस आधार पर होता है? (केमेस्‍ट्री)
  • जवाब – ? (नहीं पता)
  • सवाल नंबर चार – परमाणु की पहली कक्षा में कितने इलेक्ट्रान होते हैं? (केमेस्‍ट्री)
  • जवाब – 2 (सही जवाब)
  • सवाल नंबर पांच – परमाणु की अन्तिम से पहली कक्षा में अधिकतम इलेक्ट्रानों की संख्या ? (केमेस्‍ट्री)
  • जवाब – 18 (सही जवाब)
  • सवाल नंबर छह – परमाणु की सबसे अन्तिम कक्षा में अधिकतम कितने इलेक्ट्रान हो सकते हैं? (केमेस्‍ट्री)
  • जवाब – 32 (गलत)
  • सवाल नंबर सात – राष्‍ट्रकवि सोहन लाल द्विवेदी के बारे में बताइए। हिन्‍दी का प्रश्‍न। (सोहनलाल द्विवेदी फतेहपुर के ही रहने वाले थे)
  • जवाब – नहीं पता
  • सवाल नंबर आठ – तुलसीदास का निधन कहां हुआ? हिन्‍दी का प्रश्‍न।
  • जवाब – नहीं पता

दरअसल, ये वह सवाल हैं जिनको हाईस्कूल का औसत छात्र भी बता सकता है।

हालांकि, इतने से यह कहना मुनासिब नहीं है कि टॉपर छात्रा हाल ही में उजागर हुए बिहार के परिणामों के पैटर्न पर ही टॉप हुई है। मगर इसका परीक्षण किया जाना भी जरूरी है कि पढ़ाई से अधिक परिणामों को लेकर आपसी गलाकाट प्रतिष्पर्धा में माने जाने वाले दोनो ही विद्यालयों को टापरों की नर्सरी का खिताब कैसे मिला है।

यह अच्छी बात होगी कि टॉपर छात्राओं की निजी मेधा का प्रतिफल उन्हे मिला हो लेकिन यह भी जानना जरूरी है कि परीक्षा की शुचिता के हनन से तो परिणाम प्रभावित नहीं हैं।

टॉपर छात्राओं से जब उनकी मेधा जांचने की कोशिश की गयी तो लगा कि या तो वह इतनी बड़ी सफलता से विह्वल होकर सही जवाब नहीं दे पा रही है या फिर मीडिया के जमावड़े के चलते असहज होना इसका कारण हो सकता है। लेकिन इस बात को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता कि बेहद आसान से सवालों के जवाब ठीक न दे पाने के कारण इन टापरों की योग्यता की जांच जरूरी है।

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