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जातीय मुद्दों की हवा में बीजेपी से छिन सकती है गांधीनगर की बची जमीन!

December 12, 2017

Congress-BJP

गुजरात में विधानसभा चुनाव प्रचार अपने अंतिम मुकाम पर है। प्रदेश की राजधानी गांधीनगर में इस बार चुनावी तस्‍वीर साल 2012 के चुनाव से अलग है। गुजरात में विकास का मुद्दा गायब है और जातीय समीकरण हावी है। जातीय बयार बहने से भाजपा की परेशानी बढ़ी हुई है। अनामत आंदोलन की वजह से पाटीदार समाज भाजपा के खिलाफ दिख रहा है। तो अल्पेश ठाकोर के बिरादरी वाले ठाकोर मतदाताओं के संख्या की इधर भरमार है।

भाजपा खेमें में बेचैनी साफ देखी जा सकती है। गांधीनगर जिले की 5 सीटों में से 2 सीटों पर भाजपा ने पाटीदार बिरादरी के लोगों को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस के दमदार विधायक को तोड़कर अपने पाले में लाकर उम्मीदवार बनाने का भी खेल खेला है। मगर जाति गणित के खेल में यहां भाजपा की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। यहां पटेल और ठाकोर बिरादरी के मतदाताओं के बीच का गठजोड़ भाजपा को भारी पड़ रहा है।

आरक्षण आंदोलन को लेकर अलग-अलग धुरी पर नजर आ रहे ठाकोर और पाटीदार समाज के गठजोड़ की असल परीक्षा गांधीनगर में है। यहां पाटीदार और ठाकोर बिरादरी के मतदाताओं की संख्या अधिक है। यदि दोनों ही मतदाता साथ आएं तो कांग्रेस की राह इस पूरे जिले में आसान रह सकती है। वरना उसे खामियाजा उठाना पड़ सकता है। वैसे तो गांधीनगर में कांग्रेस पार्टी पिछले चुनाव में भी भाजपा पर भारी थी। जिले के 5 विधानसभा सीटों में से 3 पर कांग्रेस का कब्जा था। मात्र 2 सीटों पर ही भाजपा को जीत नसीब हुई थी। इस दफे पार्टी अपनी संख्या बढ़ाना चाहती है। मगर उसकी राह में रोड़ा पाटीदार और ठाकोर बिरादरी की एकजुटता है। यह एकजुटता जमीन पर नजर भी आ रही है।


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