Flash News

और कितने सुबोध कुमार…?

December 7, 2018

images_1

फर्ज निभाते- निभाते बुलंदशहर के इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह जिस अनियंत्रित भीड़ को शांत कराने के लिए सीना तान कर खड़े रहे, उन्हें उसी भीड़ के सामने गोलियों से मार दिया गया और हम कुछ नहीं कर सकेl इसे  सिस्टम की निर्लज्जता कहें या राजनीतिक लोहा गरमाने के लिए कोई सुनियोजित षडयंत्र.. कारण चाहे जो भी हो मगर स्तब्ध करने वाली इस हिंसक घटना ने देशभर के पुलिस वालों को अंदर से झकझोर दिया है। आमतौर पर हम पत्रकार पुलिस को लेकर बेरहम नजरिया रखते हैं। जनता का नजरिया और सोच भी पुलिस के प्रति अच्छी नहीं है। लेकिन ऐसा भी नहीं कि पूरा पुलिस महकमा सत्ता का गुलाम और उनकी कठपुतली है । एटीएस प्रमुख रहे हेमंत करकरे,खनिज माफिया द्वारा मारे गए आईपीएस नरेंद्र कुमार, शराब माफिया द्वारा जानलेवा हमले के शिकार आईपीएस अजय देवगन और सुबोध कुमार सिंह जैसे दबंग जाबांजो  की कहानियां हमें यह भी बताती हैं कि पुलिस का पूरा महकमा नपुंसक, मजबूर, राजनीतिक आकाओं का गुलाम और ठुल्ला भी नहीं है । खाकी वर्दी के प्रति फर्ज निभाने के लिए स्वयं को कुर्बान करने वाले शहीद पुलिस वालों का सीना वास्तव में 56 इंच का है वरना इसका जुमला सुनकर हमारे आपके कान पक गए हैं। पुलिस के सीने में दिल धड़कता है लेकिन भावुकता की मनाही है। क्योंकि भावुकता कभी कभी फर्ज निभाने में रोड़ा पैदा कर देती है। सुबोध सिंह की निर्ममता से की गई हत्या में पुलिस वालों के परिजनों के दिल को धड़का दिया है।पुलिस तो अपने राजनैतिक आकाओं के इशारे पर भावुक होती है। उन्हीं के इशारे पर लाठी लेकर के पीछे दौड़ती है। लेकिन भीड़ अब पुलिस की जान लेने लगी है।

जरा सोचिए यह कैसा समाज हम तैयार कर रहे हैं ? सोचिए जरूर, क्योंकि आज सुबोध कुमार को मारा गया कल हमारे आपके घरों पर भीड़ की शक्ल में कोई हमले करवा सकता है। राजनीतिक आका के लिए भीड़ किसी से बदला लेने का अचूक हथियार बन गई है। जनता का अपराधियों के प्रति भय मिटाने वाली पुलिस भय के साए में जीने को आज क्यों मजबूर है, इस सवाल पर विचार करने की जरूरत है। सुबोध कुमार सिंह,नरेंद्र सिंह का फर्ज के लिए बलिदान दिल दहलाने वाली घटना है। पुलिस की छवि पर कालिख इसलिए पुत रही है क्योंकि अक्सर राजनीतिक दुर्भावना बस कार्य किए जाते हैं। निर्दोषों को बलि का बकरा बनाकर टांग दिया जाता है और असली अपराधी को राजनीति आका बचा ले जाते हैं । कभी थाने के भीतर घुस कर तो कभी पुलिस की सरेआम कॉलर पकड़कर। आखिर इतने बुलंद हौसले के पीछे क्या वजह हो सकती है ? आप होशियार हैं, बेहतर समझते हैं। यह आप बेहतर समझते हैं ।लेकिन क्या इस तरह से पुलिस का सिस्टम सुधर पायेगा? क्या उन पर हो रहे हमले रुक पाएंगे?  इसलिए जरूरी है कि पुलिस पर राजनीतिक हस्तक्षेप समाप्त किया जाए। नेताओं की तीमारदारी से मुक्त हुए बिना पुलिस की इज्जत नहीं बढ़ेगी। अपने स्वार्थ की सिद्धि के लिए राजनीतिक आकाओं ने भीड़ की शक्ल बना ली है। जब चाहे जिसके पीछे उसे छोड़ दो ..मार डालो…। पुलिस को भी सोचना पड़ेगा कि राजनीति आका के इशारे पर नाचने की भूल उन्हें कितनी महंगी पड़ सकती है। अपराध करने और उसे रोकने वाले एक से हो गए हैं। बस हम लोग हैं जो ऐसे चेहरे पर पड़े नकाबो को हटाकर कुछ देखना समझना ही नहीं चाहते। मोबाइल प्रेम में फंसकर हमारी याददाश्त इस कदर कमजोर पड़ चुकी है कि 2 दिन बाद सब कुछ भूल जाते हैं।  इसी का फायदा राजनीति का उठाते हैं। कभी अखलाक के नाम पर तो कभी कैराना कांड या कभी प्रोफेसर सबरवाल के साथ भीड़ की शक्ल में घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और शान दिखाने के चक्कर में युवा पीढ़ी भेड़ चाल से बाहर निकलने को तैयार नहीं है । राजनीतिक आकाओं के पास सारे खबरिया चैनलों के रिमोट होते हैं। कौन सी खबर कब कैसे दिखानी है वही तय करने लगे हैं ।और हम उन खबरों को सच मान लेते हैं। फेसबुक,व्हाट्सएप से निकलने की फुर्सत मिले तो यह भी सोचिए कि कभी किसी गरीब के लिए कोई सामाजिक संस्था जनप्रतिनिधि नेता तथाकथित स्वयंसेवी या भीड़ खड़ी क्यों नहीं दिखती। सिर्फ गाय, मंदिर- मस्जिद के नाम पर बेगुनाहों को आखिर कब तक मारा जाता रहेगा ? हमें भेड़ चाल के हिप्नोटिज्म से बाहर आना होगा।  जो चश्मा पहनाकर  हमें केवल नफरत सांप्रदायिकता, धार्मिक भावना भड़काने का चित्र दिखाया जा रहा है, उसे उतार फेंकिये। पुलिस को भी अपनी अंतरात्मा जगानी होगी।

और अंत में एक शायर के शब्दों से…

यह लोग तन के नहीं मन से भी अपाहिज हैं,

उधर चलते हैं जिधर रहनुमा चलाता है ।

हमें इस धारणा से बाहर आना ही होगा। तभी एक सभ्य समाज का निर्माण होगा। तभी मंदिर- मस्जिद के झगड़े खत्म होंगे।  और फिर हमें कोई भी रहनुमा या यूं कहें कि राजनीति आका अपने इशारों पर नहीं चला पाएगा ।

विजय शुक्ला

Like our page https://www.facebook.com/MalayalamDailyNews/ and get latest news update from USA, India and around the world. Stay updated with latest News in Malayalam, English and Hindi.


Like our page https://www.facebook.com/MalayalamDailyNews/ and get latest news update from USA, India and around the world. Stay updated with latest News in Malayalam, English and Hindi.

Print This Post Print This Post
To toggle between English & Malayalam Press CTRL+g

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Read More

Scroll to top