वायरस या बैक्टीरिया को शरीर में फैलने से इस तरह रोकती हैं कोशिकाएं

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जब भी रोग प्रतिरोधक क्षमता या इम्युनिटी की बात होती है तो हमारे मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर हमारे शरीर की कोशिकाएं या तंतु किस तरह शरीर में आनेवाले वायरस से फाइट करते हैं। साथ ही यह जानने की इच्छा होती है कि कौन-सी सेल किस रूप में काम करती है। आइए, ऐसे हर सवाल का जबाव यहां जानते हैं…

सबसे पहले काम करती है यह इम्युनिटी
-हमारे शरीर में दो तरह की इम्युनिटी होती है। एक होती है इनेट इम्युनिटी और दूसरी होती है अडेप्टिव इम्युनिटी। इन दोनों के काम करने का तरीका एकदम अलग है। इनेट इम्युनिटी ही वह रोग प्रतिरोधक क्षमता है जो शरीर में किसी भी वायरस या बैक्टीरिया के प्रवेश करने के बाद कुछ ही देर में ऐक्टिव होकर उसे खत्म करने में जुट जाती है।

इनका भी है अपना रोल
-इन्नेट इम्युनिटी हमारे शरीर को प्राकृतिक तौर पर मिली होती है। अगर किसी एक व्यक्ति की बात की जाए तो सिर्फ और सिर्फ यह इम्युनिटी प्रारंभिक स्तर पर उसे खतरनाक बीमारियों से बचाती है।

-इन्नेट इम्युनिटी में 7 तरह की सेल्स काम करती हैं। इन सभी सेल्स या कोशिकाओं का अपना अलग रोल होता है। प्रारंभिक स्तर पर मोनोसाइट्स और मास्ट सेल्स वायरस की पूरी जानकारी जुटाती हैं और इस तरह के कैमिकल रिलीज करती हैं ताकि इम्युनिटी सेल्स अधिक से अधिक संख्या में तुरंत उस जगह पहुंच सकें, जहां वायरस है।

फिर आता है इन सेल्स का नंबर
-मोनोसाइट्स और मास्ट सेल्स के बाद न्यूट्रोफिल्स, इस्नोफिल्स,बेसोफिल्स और नैचरल किलर सेल्स का नंबर आता है। ये अपने-अपने रोल को निभाते हुए वायरस और बैक्टीरिया को ना केवल मारती हैं बल्कि उससे हुए नुकसान की भरपाई करती हैं और उसके डेड पार्टिकल्स को खाकर खत्म कर देती हैं।

इस तरह बंटा हुआ है इन तीनों का रोल
– हमारे शरीर में जिस जगह पर बैक्टीरिया या वायरस का अटैक होता है, उस जगह पर जो कोशिकाएं सबसे पहले पहुंचती हैं उनमें न्यूट्रोफिल्स की संख्या सबसे अधिक होती है।

-न्यूट्रोफिल्स पैथोजेन (वायरस या बैक्टीरिया) को खाकर खत्म करते हैं। लेकिन अगर कोई वायरस या बैक्टीरिया बहुत अधिक घातक हो और उनके लिए उससे फाइट करना मुश्किल हो तो ये उसे रोके रखने के लिए फाइट करते रहते हैं इस काम कमें बेसोफिल्स इनकी मदद करते हैं।

-अगर न्यूट्रोफिल्स और बेसोफिल्स को अधिक सपॉर्ट की जरूरत होती है तो तो बेसोफिल्स सेल्स ऐसे कैमिकल्स को रिलीज करना शुरू कर देती हैं, जो दूसरी इम्युनिटी सेल्स को जल्द से जल्द उस जगह आने का संदेस देती हैं, जहां पैथोजेन का अटैक हुआ होता है।

नैचरल किलर सेल्स – जब सभी सेल्स मिलकर पैथोजने को खत्म कर देती हैं तो नैचरल किलर सेल्स उन सेल्स को खाकर खत्म करने का काम करती हैं, जिनमें इंफेक्शन आ चुका होता है। ताकि यह इंफेक्शन दूसरी कोशिकाओं में ना फैले।

पैरासाइट्स को मारते हैं इस्नोफिल्स
-बैक्टीरिया और वायरस तो हमें आंखों से नहीं दिखाई पड़ते लेकिन पेट में होनेवाले कीड़ों को हम मल में उनकी उपस्थिति देखकर जान लेते हैं। तो इस तरह के जो बड़े पैरासाइट्स हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं, उन्हें खत्म करने का काम इस्नोफिल्स करते हैं।

-लेकिन जब इन पैरासाइट्स की संख्या बहुत अधिक बढ़ जाती है और हमारे भोजन, लाइफस्टाइल द्वारा भी हमारे शरीर को सपॉर्ट नहीं मिलता तब इन पैरासाइट्स को खत्म करने के लिए हमें दवाओं की जरूरत पड़ती है।

एक तरह का ब्रिज होते हैं ये सेल्स
-अब बात करते हैं डैंड्राइटिक सेल्स की। ये सेल्स एक पुल या मैसेंजर की तरह काम करते हैं। जब हमारे शरीर की इनेट इम्युनिटी किसी पैथोजेन से फाइट कर चुकी होती है तो उसके पास उससे जुड़ी सभी जानकारी होती है।

-यानी यह पैथोजेन कैसा, कैसे नुकसान कर रहा है, इसे मारने के लिए हमें किस तरह के सेल्स अधिक बनाने होंगे आदि… इससे अडेप्टिव इम्युनिटी को काम करने में आसानी होती है और हमारा शरीर जल्दी से जल्दी रोग मुक्त हो पाता है।

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